Daivasura Sampad Vibhaga Yoga
दैवासुर सम्पद विभाग योग
आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया । यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः॥ 16:15॥
आढ्यः, अभि-जन-वान् अस्मि, कः अन्यः अस्ति सदृशः मया? यक्ष्ये, दास्यामि, मोदिष्य, इति अज्ञान-वि-मोहिताः,
आढ्यः (धनी), अभि-जन-वान् (बड़े कुटुंब वाला) अस्मि (हूँ), मया (मेरे) सदृशः (समान) अन्यः (दूसरा) कः (कौन) अस्ति (है)? यक्ष्ये (मैं यज्ञ करूँगा), दास्यामि (दान करूंगा), मोदिष्य (आनंदित होऊंगा), इति (इस प्रकार) अज्ञान-वि-मोहिताः (अज्ञान से मोहग्रस्त);
Hindi
मैं धनी हूँ, बड़े अभिजनों या कुटुंब वाला हूँ, मेरे समान दूसरा भला कौन है? मैं यज्ञ करूँगा, दान दूँगा, मजे करूँगा— इस प्रकार अज्ञान से मोहित रहने वाले, तथा..
English
I am wealthy, have a large family, and who can compare to me? I will perform grand rituals (yajnas), make generous donations, and revel in enjoyment." Such individuals, captivated by such delusion, (16:15)