Vibhuti Yoga
विभूति योग
नान्तोऽस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परन्तप । एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मया ॥ 10:40॥
न अन्तः अस्ति मम दिव्यानाम् विभूतीनाम्, परन्तप! एषः तु उत्-देशतः प्रोक्तः विभूतेः विस्तरः मया।
परन्तप (हे शत्रुओं को संतप्त करने वाले)! मम (मेरी) दिव्यानाम् (दिव्य) विभूतीनाम् (विभूतियों का) अन्तः (अंत) न (नहीं) अस्ति (है); मया (मेरे द्वारा) विभूतेः (विभूति का) एषः (यह) विस्तरः (विस्तार) तु (तो) उत्-देशतः (संक्षेप में) प्रोक्तः (कहा गया)।
Hindi
हे अर्जुन! मेरी दिव्य विभूतियों का अंत नहीं है। अपनी विभूतियों का यह विस्तार तो मैंने सिर्फ उदाहरण के तौर पर कहा है।
English
O Arjuna, there is no limit to My divine manifestations. What I have conveyed here is merely a glimpse of My infinite expanse. (10:40)
Hindi
गीता के उपर्युक्त श्लोकों की छाया मानस के निम्नलिखित अंश में देखें — 'रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मांड' (रामचरितमानस, बालकांड, 201)।