Vibhuti Yoga
विभूति योग
दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् । मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् ॥ 10:38॥
दण्डः दमयताम् अस्मि, नीतिः अस्मि जिगीषताम्, मौनम् च एव अस्मि गुह्यानाम्, ज्ञानम् ज्ञान-वताम् अहम्।
दमयताम् (दमन करने वालों का) दण्डः (दंड) अस्मि (हूँ), जिगीषताम् (जीतने की इच्छा रखते वालों की) नीतिः (नीति) अस्मि (हूँ), गुह्यानाम् (गुप्त चीजों के लिए) मौनम् (मौन) अस्मि (हूँ), च (और) ज्ञान-वताम् (ज्ञानी लोगों का) ज्ञानम् (ज्ञान) अहम् (मैं) एव (ही)।
Hindi
{अराजकता का} दमन करने वालों का दंड हूँ, जीतने की इच्छा वालों की {रण-} नीति हूँ, गुप्त रखने योग्य भावों का रक्षक मौन हूँ, और ज्ञानवानों का ज्ञान भी मैं ही हूँ।
English
I am the punishment designed to suppress {lawlessness}; I am the strategy employed by those striving for victory; I am the silence that fosters secrecy, and I am the knowledge of the knowledgeable. (10:38)
Hindi
ध्यान-योगी यहाँ 'दमन' का अर्थ इंद्रिय-निग्रह या इंद्रिय-दमन और 'दंड' का अर्थ मेरुदंड के रूप में करते हैं, जिससे होकर कुंडलिनी-शक्ति विभिन्न चक्रों को जाग्रत करती हुई मस्तक के ऊपर सहस्रार चक्र की ओर बढ़ती है।